कुमार गौरव
बांदा। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घायलों का इलाज मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में किया जाता दिखाई दे रहा है। यह दृश्य सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और स्वास्थ्य विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में अस्पताल का कमरा अंधेरे में डूबा हुआ दिखाई दे रहा है। इस बीच स्वास्थ्यकर्मी एक घायल मरीज की मरहम-पट्टी मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर नाराजगी और चिंता दोनों देखने को मिल रही है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि अस्पताल में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। बिजली गुल होने की स्थिति में मरीज का इलाज मोबाइल टॉर्च की रोशनी के सहारे किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में भी अस्पतालों में इस तरह की व्यवस्था बेहद चिंताजनक है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा रहता है कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बिजली जाने की स्थिति में इनवर्टर और पावर बैकअप की पर्याप्त व्यवस्था होती है, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। लेकिन नरैनी सीएचसी से सामने आए इस वीडियो ने इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई लोगों ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का उदाहरण बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पतालों में ऐसी स्थिति रहेगी तो ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर उपचार कैसे मिल पाएगा।
इस पूरे मामले में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह वीडियो 10 मार्च का बताया जा रहा है और हाल ही में उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि नरैनी सीएचसी में इनवर्टर और पावर बैकअप की व्यवस्था मौजूद है।सीएमओ ने कहा कि मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में इलाज किए जाने का मामला गंभीर है और इस संबंध में सीएचसी नरैनी के जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।










