कुमार गौरव
बांदा। केन नदी की धारा इन दिनों कथित तौर पर ‘लाल सोने’ की लूट की गूंज से कांपती नजर आ रही है। जिले की मरौली खंड-4 बालू खदान पर आरोप है कि यहां खनन माफिया नियमों को धता बताते हुए खुलेआम अवैध खनन का खेल खेल रहे हैं। भारी पोकलैंड मशीनों की गर्जना से नदी की कोख तक खंगाली जा रही है और ओवरलोड ट्रकों की कतारें बालू की ढुलाई में लगी बताई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस कथित खेल के बावजूद जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान क्षेत्र में निर्धारित सीमांकन से बाहर तक खनन किया जा रहा है और नदी की जलधारा के आसपास भी मशीनें उतार दी गई हैं, जो खनन गाइडलाइन के खिलाफ है। ग्रामीणों के अनुसार खदान क्षेत्र में दिन-रात भारी पोकलैंड मशीनें नदी की गहराई तक बालू निकालने में जुटी रहती हैं। इससे न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, बल्कि पर्यावरण और आसपास के गांवों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

लोगों का कहना है कि खदान से निकलने वाले बालू से भरे ट्रकों का ओवरलोड परिवहन भी लगातार देखा जा रहा है।कुछ ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि खदान तक पहुंचने के लिए किसानों के खेतों से जबरिया रास्ता बनाया गया है। जाने की घटनाएं सामने आई हैं। कई लोग प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मरौली खंड-4 खदान को लेकर उठ रहे सवाल अब जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन में किसी भी प्रकार की अनियमितता हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब निगाहें जिलाधिकारी जे. रीभा पर टिकी हैं कि वह इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती हैं?










