कुमार गौरव
बांदा। जिले में ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ को लेकर ‘बड़ा विवाद’ खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग और निजी कंपनी पर ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाते हुए डीएम को ज्ञापन सौंपा है। आरोप है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन मीटर लगाए जा रहे हैं और विरोध करने पर डराया-धमकाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निजी कंपनी के कर्मचारी घर-घर पहुंचकर मीटर लगाने का दबाव बना रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है तो उस पर पुलिस केस और भारी जुर्माने की धमकी दी जाती है। लोगों ने इसे असंवैधानिक और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताया है। जिन घरों में पहले से प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां नई समस्या सामने आई है।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि रिचार्ज कराने के बाद भी बैलेंस स्वतः कट जाता है और हजारों रुपये बिना कारण गायब हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मीटर में बिना किसी स्पष्ट कारण के बिल माइनस में चला जाता है, जिससे अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस संबंध में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है कि उपभोक्ताओं का पैसा आखिर जा कहां रहा है। बिल जमा करने के बावजूद बिजली कटने की घटनाओं ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और पूरी व्यवस्था पर उनका भरोसा डगमगा रहा है।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में मांग की है किजबरन लगाए गए प्रीपेड मीटरों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उपभोक्ताओं को पोस्टपेड मीटर का विकल्प दिया जाए। “स्मार्ट मीटर” योजना को लेकर बढ़ता विरोध अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है










