कुमार गौरव
बांदा। जिले के पैलानी क्षेत्र की गुरगवां बालू खदान में अवैध खनन की बहार है। खदान संचालक शशांक मिश्रा एवं प्रशासन में “चुम्मा चुम्मा”हो रहा है? इस खनन पर जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

चर्चाओं को यदि सच मानें तो इस खदान के संचालक शशांक मिश्रा का दावा है की उसका खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव से पारिवारिक संबंध हैं ! फिर खनिज अधिकारी की क्या मजाल की हमारे अवैध खनन में हस्तक्षेप करे! फिलहाल इस खदान में आलम यह है की खनन माफिया एवं उनके गुर्गों द्वारा खनिज नियमों की अनदेखी करते हुए दिन-रात प्रतिबंधित भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अवैध खनन का हाहाकार है! एनजीटी के नियमों को ठेंगा है। कथित निकम्मा प्रशासन क्या लाचार है?

दुस्साहस यह है की निर्धारित क्षेत्र से अलग हटकर एवं किसानों की निजी जमीनों से भी बालू निकाली जा रही है। ओवर लोड वाहनों नें ग्रामीण सड़कें तहस नहस कर दी है। इन परिस्थितयों से प्रशासन अवगत है,पर सब कुछ नियम विरुद्ध “दनादन दे धन” के दम पर चल रहा है! जिले के अधिकारी इस अवैध खनन पर कार्रवाई करने की बजाय गलबहियां सी किये हुए हैं! आरोप है कि खनन माफिया शशांक की मजबूत प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक संरक्षण के साथ ही धन मॅनेजमेंट से अधिकारी जी हजूरी कर रहें हैं! इन्हें यहां का अवैध खनन नहीं दिखाई देता। जिलाधिकारी और खनिज अधिकारी भी इस अवैध खनन पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं? ऐसा क्यों हो रहा है?कुछ न कुछ तो दाल में काला है।









