भ्रष्टाचार के हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई अब स्थानीय कोर्ट में, बर्खास्त आईपीएस पाटीदार और अब्बास अंसारी के केस ट्रांसफर

कुमार गौरव

बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए न्याय प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव हुआ है। अब महोबा के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी मणिलाल पाटीदार और सपा विधायक अब्बास अंसारी व उनकी पत्नी निखत बानो से जुड़े बहुचर्चित भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई लखनऊ की बजाय बांदा की नवगठित ‘एंटी करप्शन कोर्ट’ में होगी। मंडल स्तरीय भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट की स्थापना के बाद, लखनऊ की विशेष अदालतों में लंबित चित्रकूट मंडल के कुल 174 मामले बांदा स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इस नई व्यवस्था से बांदा के साथ-साथ महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट जनपदों के भ्रष्टाचार से संबंधित मुकदमों का ट्रायल अब यहीं संपन्न होगा। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि संबंधित पक्षों को भी बड़ी राहत मिलेगी। महोबा में वर्ष 2020 में क्रशर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है। व्यापारी के भाई द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में पाटीदार पर वसूली और हत्या जैसे संगीन आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा, 22 जुलाई को दर्ज भ्रष्टाचार की एक अन्य प्राथमिकी भी अब बांदा कोर्ट ही देखेगी।

फरवरी 2023 में चित्रकूट जेल में बंद सपा विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो की जेल के अंदर अनाधिकृत रूप से मौजूदगी के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस केस में निखत बानो, उनके चालक नियाज और जेल के कई अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, एडीजे न्यायिक चंद्रपाल द्वितीय विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण के मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। जानकारी मिल रही है कि बर्खास्त आईपीएस पाटीदार के मामले में अगली सुनवाई 11 मई को नियत की गई है। वहीं, सपा विधायक अब्बास अंसारी के मामले के संदर्भ में उन्हें समन जारी किए गए हैं, हालांकि वे अभी तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं।

एडीजे (सहायक अभियोजन अधिकारी) मौर्या ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामलों के स्थानांतरण से स्थानीय न्याय प्रणाली मजबूत होगी। उन्होंने कहा, “अब फरियादियों और संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए लंबी दूरियां तय नहीं करनी पड़ेंगी। यह मंडल स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।” इस नई व्यवस्था के बाद अब पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की नजरें बांदा की इस विशेष अदालत पर टिकी हैं, जहां इन हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों का निपटारा जल्द होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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