कुमार गौरव
बांदा। बांदा की सड़कें अब सड़कें नहीं रहीं, कब्रगाह बन गई हैं। एमपी के छतरपुर की रामपुर मौरंग खदान से निकलने वाले ओवरलोड डंपर यूपी में मौत बनकर दौड़ रहे हैं। करोड़ों के नए पुल और हाईवे इन ‘यमदूत’ ट्रकों के पहियों तले कुछ ही महीनों में चकनाचूर हो रहे हैं। सिस्टम आंख बंद करके बर्बादी का तमाशा देख रहा है।

सबसे बड़ा मौत का खेल एमपी के छतरपुर स्थित रामपुर मौरंग खदान में चल रहा है। यहां दिन दहाड़े NGT के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। नदी की बीच धारा में लिफ्टर ठोककर मौरंग का खून चूसा जा रहा है। एमपी में मौरंग सस्ती और खदान से ही ओवरलोड की खुली छूट। इसी ने रामपुर खदान को माफियाओं का सबसे महफूज अड्डा बना दिया है। लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज पाण्डेय का कबूलनामा सिस्टम की पोल खोल रहा है। साफ कहा कि सड़कें और पुल मानक पर बने हैं। पर जब इन पर क्षमता से 4 गुना ज्यादा भार वाले हैवान डंपर दौड़ेंगे तो ये टिकेंगे कैसे। यह बयान आरटीओ खनन और पुलिस की नाकामी का लाइव सबूत है। सवाल सीधा है कि एमपी से 4 गुना ओवरलोड डंपर बांदा की सीमा में एंट्री कैसे पा रहे हैं।

ओवरलोडिंग का कहर गिरवां, शेरपुर और श्योढ़ां झेल रहे हैं। लाखों खर्च कर जिन पुलों की मरम्मत हुई थी, वे फिर दरक गए हैं। एप्रोच मार्ग धंस चुके हैं। सड़कें गड्ढों में बदल गई हैं। ग्रामीण हर दिन इस डर में जी रहे हैं कि कहीं अगला पुल इन्हीं डंपरों के बोझ से भरभरा कर न गिर जाए। जब पीडब्लूडी खुद चिल्ला रहा है कि 4 गुना भार से सब टूट रहा है और नदी में लिफ्टर से लूट जगजाहिर है तो बांदा प्रशासन चुप क्यों है। क्या दर्जनों लाशें गिरने का इंतजार है। क्या कोई बड़ा पुल ढहने के बाद ही नींद टूटेगी। वक्त आ गया है कि डीएम और एसपी इस ‘ओवरलोड सिंडिकेट’ की गर्दन दबोचें। वरना एमपी के माफिया यूं ही यूपी का राजस्व लूटते रहेंगे और बांदा की सड़कें कब्रिस्तान बनती रहेंगी।










