June 12, 2026 10:52 pm

चोरी और सीनाजोरी’: चप्पल कांड में घिरे मोहन नें बचने को विधायक प्रकाश पर फोड़ा ठीकरा,जनता नाराज

विनोद मिश्रा

बाँदा। जिले की सियासत में ‘चप्पल कांड’ अब मोहन साहू के लिए गले की फांस बन गया है। सपा नेता और पूर्व पालिका चेयरमैन मोहन साहू पर दलित उत्पीड़न और 22 लाख की स्टांप चोरी जैसे गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि अपने गैर कानूनी आचरण को छिपाने के लिए मोहन साहू अब सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी पर दोष मढ़कर बचने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। सियासी गलियारों में इस ‘चोरी और सीनाजोरी’ की जमकर निंदा हो रही है।
मामले की जड़ में एक विवादित आवास है।

आरोप है कि मोहन साहू ने अपने रिश्तेदार अजीत कुमार साहू और साझेदारों के नाम पर उसकी रजिस्ट्री करा ली। पीड़ित दलित महिला गीता वर्मा का आरोप है कि इसी खेल में उसका आशियाना छिन गया। आरोप और गहरा तब हुआ जब दावा किया गया कि कागजों में हेरफेर कर 22 लाख रुपये की स्टांप चोरी की गई। बताया जा रहा है कि अजीत कुमार साहू को सरकारी नोटिस मिल चुका है और जिलाधिकारी न्यायालय में वाद संख्या 542/2025 चल रहा है।

वायरल वीडियो में गीता वर्मा द्वारा मोहन साहू पर चप्पल बरसाने की घटना को पीड़िता के पक्षकार ‘आत्मसम्मान का विस्फोट’ बता रहे है। उनका कहना है कि जब एक बेघर मां की कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उसका सब्र टूट गया। यह हमला नहीं, सिस्टम और भू माफिया के खिलाफ एक लाचार महिला की आखिरी चीख थी। हास्यास्पद यह है की कानून के शिकंजे में फंसते देख मोहन साहू ने सारा ठीकरा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी पर फोड़ दिया। दावा किया गया कि यह घटना विधायक ने करवाई है। इस पर सियासी पंडितों से लेकर आम जनता तक में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि खुद अवैध रजिस्ट्री कराओ, खुद सरकारी टैक्स की डकैती करो, खुद जनता की चप्पल खाओ और दोष दूसरे पर मढ़ दो। यह सियासी ड्रामेबाजी अब नहीं चलेगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाँदा की जनता भोली हो सकती है,पर बेवकूफ नहीं। विधायक प्रकाश द्विवेदी की साफ सुथरी छवि पर कीचड़ उछालकर मोहन साहू अपने स्टांप चोरी और दलित उत्पीड़न के आरोपों से बच नहीं सकते। स्टांप चोरी का नोटिस और रजिस्ट्री के कागजात खुद गवाही दे रहे हैं। सियासत में कहा जाता है कि झूठ के पैर नहीं होते। मोहन साहू पर लगे आरोपों की फेहरिस्त लंबी है। भाई, रिश्तेदारों और साझेदारों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में एक गरीब का घर उजाड़ने का आरोप सबसे भारी पड़ रहा है। फिलहाल गेंद कानून के पाले में है। देखना है कि चप्पल कांड का यह प्रकरण कब खत्म होता है और ‘जालसाज गैंग’ को उसकी सही जगह कब मिलती है!

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