विनोद मिश्रा
बाँदा। डीएम अमित आसेरी की कलम का जोर मछलियों के जाल पर बेअसर साबित हो रहा है। साहब आदेश पर आदेश निकाल रहे हैं और मातहत उसे रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं। नतीजा यह है कि प्रजनन काल में ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित केन, यमुना, बागै और रंज नदियां शिकारियों का अड्डा बन चुकी हैं। दिन में कानून की किताब खुलती है और रात होते ही नदियों में जाल बिछ जाते हैं।

मत्स्य अधिनियम चीख चीख कर कहता है कि मानसून अवधि यानी 1 जून से 31 अगस्त तक नदियों में मछली पकड़ना महापाप है। मछलियों की वंश वृद्धि के लिए यह समय सबसे अहम होता है। डीएम अमित आसेरी ने भी सख्त हिदायत दी कि कोई जाल न डाले, कोई नाव न उतारे। पर यहां उल्टी गंगा बह रही है। डीएम साहब का आदेश सुनकर मातहत कान में तेल डाल लेते हैं और शिकारी नदी में जाल। जैसे ही सूरज ढलता है, जिला मुख्यालय के स्टेडियम, इंद्रानगर, बिजली खेड़ा में अवैध मछली बाजार गुलजार हो जाते हैं। ताजी ताजी प्रतिबंधित मछलियां टेबल पर सजती हैं और ग्राहक मोलभाव करते हैं।

ये वही मछलियां हैं जिन्हें प्रजनन काल में हाथ लगाना भी जुर्म है। पर यहां तो खुलेआम बोली लग रही है। मत्स्य विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम का गठन फाइल में हो चुका है, जमीन पर कब आएगी, यह भगवान भरोसे है। नियम कहते हैं कि प्रतिबंध अवधि में शिकार करने पर जाल नाव जब्त होगी, FIR होगी, जेल होगी। लेकिन बाँदा में शिकारियों को पता है कि पकड़ने वाला कोई नहीं। विभागीय अमले की कमी का रोना रोकर अफसर AC कमरों में बैठे हैं और नदियों में मछलियों का कत्लेआम जारी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में पूरी नावें जाल लेकर निकलती हैं और सुबह तक क्विंटलों मछली पार हो जाती है। केन का पानी हो या यमुना की धार, बागै का कोना हो या रंज का किनारा, हर जगह जाल बिछे हैं।

डीएम के आदेश की धज्जियां उड़ रही हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना है। सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय के मोहल्लों में खुलेआम प्रतिबंधित मछली बिक रही है तो गांव देहात का क्या हाल होगा। डीएम अमित आसेरी कुछ भी आदेश करें पर मातहत पालन करने की बजाय अपना हित देख कतराते हैं। यही वजह है कि मत्स्य विभाग द्वारा मछलियों की वंश वृद्धि को सुरक्षित रखने का आदेश सिर्फ कागजी शेर बनकर रह गया है। फिलहाल बाँदा की नदियों में मछलियों का प्रजनन काल शिकार काल में बदल चुका है। डीएम के फरमान को शिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं और अफसर रिपोर्ट भेज रहे हैं कि सब ठीक है। जब तक संयुक्त टीम नदी किनारे नहीं पहुंचेगी, तब तक ‘नो फिशिंग जोन’ में फुल फिशिंग का खेल चलता रहेगा। और हां, स्टेडियम का मछली बाजार आज भी सजेगा, बैन जाए भाड़ में।










