कुमार गौरव
बांदा। दस साल की लंबी और दर्दनाक यात्रा के बाद आखिरकार एक मां को उसका खोया हुआ बेटा वापस मिल गया। बांदा पुलिस की पहल से यह संभव हो पाया है, जिसने एक परिवार की जिंदगी बदल दी है। चित्रकूट के एक छोटे से गांव में रहने वाली संगीता का 6 साल का बेटा 2015 में अमावस्या की भीड़ में खो गया था। मां ने अपने बेटे को खोजने के लिए जी जान लगा दिया, लेकिन वह नहीं मिला। अंत में थक हारकर बैठ गई। लेकिन बांदा पुलिस ने हार नहीं मानी।

बीते कुछ माह पहले एक बच्चा जिले के मटौंध थाना इलाके में रेलवे लाइन पर अकेले भटक रहा था। पुलिस ने पूछताछ की तो बच्चे ने बताया कि वह मर्का थाना इलाके का रहने वाला है। पुलिस टीमों ने परिजनों की खोजबीन की और आखिरकार संगीता को उसका बेटा वापस मिल गया। बच्चा मिलने की सूचना पर संगीता बगैर टिकट ट्रेन में यात्रा करके बांदा पहुंची और अपने लाल को गले से लगा लिया। मां को फफकते देख बच्चा भी सुबक सुबककर रोने लगा।

बांदा पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल और उनकी टीम को इस महान कार्य के लिए सलाम! उनकी इस पहल ने एक परिवार की जिंदगी बदल दी है। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज सिंह नें बताया की बाल संरक्षण की टीम नें बच्चे को मां के हवाले कर दिया है।













