कुमार गौरव
बांदा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का गृह जनपद बांदा आगमन एक साधारण दौरा नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में सामने आया। जैसे ही उनका काफिला जिले की सीमा में दाखिल हुआ, सड़कों पर कार्यकर्ताओं का सैलाब उमड़ पड़ा और देखते ही देखते पूरा माहौल सियासी रंग में रंग गया।

तिंदवारी से लेकर शहर तक हर मोड़ पर स्वागत की भव्य तैयारियां नजर आईं। फूल-मालाओं की बरसात, गूंजते नारे और कार्यकर्ताओं का उत्साह यह संकेत दे रहा था कि यह सिर्फ स्वागत नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन है। पार्टी के बड़े नेताओं—राष्ट्रीय महासचिव विशंभर निषाद, राष्ट्रीय सचिव हसन सिद्दीकी, प्रांतीय कार्यसमिति सदस्य अशोक सिंह गौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र वर्मा ने अपने नेता के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस दौरान सबसे भावुक और चर्चित क्षण तब आया, जब नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके छोटे भाई हसन सिद्दीकी वर्षों बाद आमने-सामने आए। राजनीतिक मतभेदों के चलते दूर रहे दोनों भाई इस बार गले मिलते नजर आए। यह दृश्य इतना भावुक था कि लोगों ने इसे ‘राम-भरत मिलाप’ जैसा बताया।

नसीमुद्दीन का काफिला चिल्ला, सादी मदनपुर, पपरेंदा और अतरहट जैसे गांवों से गुजरा, जहां हर जगह भारी भीड़ और स्वागत ने इस दौरे को ऐतिहासिक बना दिया। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि उनका जनाधार अब भी मजबूत है। चार दिवसीय प्रवास के दौरान वह पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगे और संगठन को मजबूती देने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। राजनीतिक जानकार इस दौरे को आगामी चुनावों की तैयारी और समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम मान रहे हैं।










