विनोद मिश्रा
बाँदा। जिला पंचायत की तहबाजारी वसूली अब ‘गुंडाटैक्स’ में बदल चुकी है। हाइवे पर खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों को जबरन रोककर खुलेआम पैसा वसूला जा रहा है। पर्ची के नाम पर रंगदारी का खेल चल रहा है। ट्रक चालक दहशत में हैं और प्रशासन खामोश! गिरवां क्षेत्र में खोही गांव के पास हालात सबसे खराब हैं। यहां दिनदहाड़े वाहनों को रोककर अवैध वसूली हो रही है! मटौंध और शहर से सटे दुरैड़ी में भी यही हाल है। दुरैड़ी में हाइवे पर वसूली की जगह थोड़ी बदल दी गई है,पर पैसा लेना बंद नहीं हुआ! चालकों का आरोप है कि तहबाजारी की रसीद के नाम पर तय रेट से कई गुना ज्यादा पैसा लिया जा रहा है।

पीड़ित ट्रक चालकों ने बताया कि वसूली करने वाले लोग खुद को ठेकेदार के आदमी बताते हैं। पैसा न देने पर गाली गलौज और मारपीट की धमकी देते हैं। कई बार गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और ड्राइवरों से अभद्रता हुई। डर के कारण कोई शिकायत नहीं करता। एक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हर चक्कर पर 500 से 2000 रुपए तक ‘गुंडाटैक्स’ देना पड़ता है। इस प्रकार 19 करोड़ के ठेके की आड़ में खेल जारी है। कहीं कहीं वसूली अड्डों से जिला पंचायत के बोर्ड हटा कर थोड़ा छिपकर वसूली हो रही है। 30 अप्रैल 2026 को ई-नीलामी में वर्ष 2026-27 के लिए खनिज परिवहन शुल्क वसूली का ठेका ‘पांडेय समूह’ को 19,04,99,368 रुपए में मिला था। यह रकम पिछले साल से कई गुना ज्यादा है।

सूत्र कहते हैं कि इतनी ऊंची बोली इसलिए लगाई गई ताकि ठेके की आड़ में अवैध वसूली कर पैसा निकाला जा सके! इस मामले पर जिला पंचायत के एमए अरविंद मोहन से बात करने की कोशिश हुई। जवाब मिला साहब मीटिंग में हैं। उधर हाइवे पर रोज ‘गुंडाटैक्स’ वसूला जा रहा है। ट्रांसपोर्टरों और चालकों ने मांग की है कि तहबाजारी की आड़ में चल रहे इस रंगदारी रैकेट को तुरंत बंद किया जाए। अवैध वसूली करने वालों पर एफआईआर दर्ज हो। साथ ही यह जांच हो कि 19 करोड़ का ठेका देने में कहीं कोई खेल तो नहीं हुआ!बांदा हाइवे पर ‘गुंडाटैक्स’ अब कानून व्यवस्था के लिए खुली चुनौती बन गया है।











