विनोद मिश्रा
बाँदा। मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक बालू माफिया का सिंडीकेट सरकार के राजस्व से खुलेआम बलात्कार कर रहा है!योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को धता बताते हुए बिना नंबर प्लेट वाले सैकड़ों ओवरलोड मौरंग लदे ट्रक रोज बांदा बॉर्डर से यूपी में दाखिल हो रहे हैं। यह खेल सिर्फ सड़कें नहीं तोड़ रहा, बल्कि सरकारी खजाने को रोज करोड़ों की चोट पहुंचा रहा है।

बांदा के गिरवां और मटौंध थाना क्षेत्र से रोजाना लगभग 300 खनन के ट्रक एमपी से यूपी में एंट्री करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें एक भी ट्रक बिना ओवरलोड के नहीं होता। ज्यादातर ट्रकों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी होती। यह ट्रक कानून को मुंह चिढ़ाते हाइवे पर फर्राटा भर रहे हैं। दूसरे प्रदेश से इतनी बड़ी तादद में ओवरलोड ट्रकों की एंट्री बांदा आरटीओ विभाग और सीमावर्ती थानों की पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है? यूपी सरकार लगातार बिना नंबर प्लेट वाले ट्रकों और खनन ओवरलोडिंग पर सख्ती के निर्देश दे रही है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के माफिया बेलगाम हैं। योगी सरकार की सख्ती के बाद भी बांदा के अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। इन ओवरलोड ट्रकों ने यूपी की सड़कों को खस्ताहाल कर दिया है। फतेहपुर से बिंदकी-ललौली के पास हाइवे पर बने गहरे गड्ढे इन्हीं ट्रकों की करतूत हैं। बांदा से लेकर कानपुर तक सड़कें टूट रही हैं। सरकार सड़क बनाने में करोड़ों खर्च कर रही है,पर तरफ माफियाओं के ट्रक उन्हें तोड़ रहे हैं। यह दोहरी मार सीधे राजस्व पर पड़ रही है। बिना रॉयल्टी, बिना टैक्स,बिना चालान के माल यूपी में खप रहा है।

एआरटीओ श्यामलाल का कहना है कि बिना नंबर प्लेट ओवरलोड ट्रकों पर एक्शन लिया जा रहा है।खनन विभाग द्वारा सरकार को रिपोर्ट जाती है। लेकिन विचारणीय यह है की अगर रोज कार्रवाई हो रही है तो रोज 300 के लगभग ओवरलोड ट्रक यूपी में घुस कैसे रहे हैं? बिना नंबर प्लेट के ट्रक बॉर्डर क्रॉस कैसे कर जाते हैं। चेकिंग बैरियर पर कौन आंख मूंदे बैठा है। मुख्यमंत्री का आदेश सख्त है तो बांदा का सिस्टम नरम क्यों है? एमपी बॉर्डर से शुरू हुआ यह ओवरलोड सिंडीकेट का खेल अब यूपी के पूरे सरकारी सिस्टम पर भारी पड़ रहा है। यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, राजस्व से सीधा बलात्कार है। अब देखना है कि सरकार का डंडा कब चलता है और इस लूट पर कब लगाम लगती है।











