कुमार गौरव
बांदा। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के प्रसिद्ध महेश्वरी देवी मंदिर और काली देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री के दर्शन के लिए श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्तों ने मंदिरों में जलाभिषेक कर विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा की। श्रद्धालु फूल-माला, पान-सुपारी और चुनरी अर्पित करते नजर आए। अगरबत्ती और धूप की सुगंध से मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मंदिर के पुजारी के अनुसार, “नवरात्रि के पहले दिन से दुर्गा सप्तशती पाठ का शुभारंभ किया गया है, जो पूरे नौ दिनों तक चलेगा। यह अनुष्ठान यजमानों के कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए किया जा रहा है।”

महेश्वरी देवी मंदिर की उत्पत्ति को लेकर एक रोचक कथा प्रचलित है। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले एक कुम्हार मिट्टी खोदने के लिए यहां आया था। खुदाई के दौरान उसे एक बड़ा पत्थर मिला, जो देखने में साधारण प्रतीत हुआ। लेकिन ध्यान से निरीक्षण करने पर उसे देवी स्वरूप का आभास हुआ। इसके बाद गांव के बुजुर्गों और संतों को बुलाया गया। पूजा-अर्चना के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वह पत्थर मां महेश्वरी देवी का दिव्य रूप है। तभी से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि नवरात्रि के दौरान जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माता के दर्शन और पूजन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। दर्शन का सिलसिला सुबह से देर रात तक जारी रहा।










