May 30, 2026 3:52 pm

विधायक विशंभर यादव बोले बांदा में प्रकृति दोहन का आपातकाल: सांसों पर संकट!

विनोद मिश्रा

बांदा। सपा विधायक विशंभर सिंह यादव नें कहा है की बुंदेलखंड का दिल कहे जाने वाले बांदा की सबसे बड़ी समस्या अब जान पर बन आई है। अंधाधुंध खनन, पेड़ों की बेरहम कटाई और जल स्रोतों की बर्बादी ने जिले को पर्यावरण आपातकाल में धकेल दिया है। नतीजा यह है कि बांदा अब 49 डिग्री तापमान में उबल रहा है और पानी के लिए त्राहिमाम कर रहा है।

विधायक विशंभर सिंह यादव मीडिया से रूबरू थे। उन्होंने कहा की बांदा में प्रकृति से खिलवाड़ की सबसे बड़ी वजह अनियंत्रित खनन है। केन नदी में दिन-रात अवैध खनन चल रहा है। नदी का प्राकृतिक बहाव और पारिस्थितिकी तंत्र तबाह हो चुका है। स्थानीय पहाड़ और चट्टानें जेसीबी की भेंट चढ़ गए। इसका सीधा असर भूजल पर पड़ा। तालाबों और पोखरों पर अतिक्रमण के कारण बारिश का एक बूंद पानी भी जमीन में नहीं उतर पाता। भीषण गर्मी शुरू होते ही नलकूप दम तोड़ देते हैं। हैंडपंप हवा फेंकने लगते हैं। बांदा के गांव से लेकर शहर तक पानी के लिए हाहाकार मचा है। कंक्रीट के जंगल और हरियाली की कमी ने गर्म हवाओं को जानलेवा बना दिया है। 49 डिग्री तापमान अब खबर नहीं, बांदा की नई पहचान बन गया है।

विधायक विशंभर यादव नें कहा की जैव विविधता उजड़ने से खेती चौपट हो रही है। उपजाऊ जमीन बंजर में बदल रही है। पानी और फसल दोनों न मिलने से किसान और मजदूर परिवार लेकर पलायन कर रहे हैं। गांव के गांव खाली हो रहे हैं। जो बचे हैं वो ‘पानी नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाने की तैयारी में हैं। विधायक विशंभर यादव नें कहा की प्रकृति का यह असंतुलन रोकने के लिए वृक्षारोपण, तालाबों का संरक्षण और खनन माफियाओं पर बुलडोजर जरूरी है। मगर जमीन पर सिर्फ कागजी दावे हैं। बांदा की अहम् समस्या अब सिर्फ पर्यावरण की नहीं, जिंदगी की है। अगर पहाड़, पेड़ और पानी नहीं बचे तो नक्शे में बांदा बचेगा, पर जमीन पर नहीं।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें