June 13, 2026 8:05 am

सपा सर्वे टीम के उड़े होश’: कार्यकर्ताओं ने कर दिया खेला, बोले अपना छोड़ो,साक्षी लाओ

विनोद मिश्रा

बाँदा। सपा प्रदेश कार्यालय की बूथ सर्वे टीम नरैनी विधानसभा पहुंची तो नजारा देख दंग रह गई। पार्टी के भीतर से ही ऐसी बगावती लहर उठी कि सर्वे वाले भी आश्चर्य में पड़ गए। सपा कार्यकर्ताओं ने अपने ही टिकट दावेदारों को सिरे से खारिज कर दिया और आरएलडी के प्रदेश महा सचिव वीरेंद्र साक्षी का नाम आगे कर दिया।

बूथ स्तर पर जमीनी हकीकत टटोलने पहुंची टीम के सामने कार्यकर्ताओं ने बेबाकी से कहा कि नरैनी में भाजपा को अगर कोई हरा सकता है तो वह वीरेंद्र साक्षी हैं। सपा से टिकट मांग रहे नेताओं को कार्यकर्ताओं ने ‘निष्क्रिय’ और ‘बैकग्राउंड म्यूजिक’ करार दिया। सर्वे टीम यह रिपोर्ट लिखते हुए भी सोच में पड़ गई कि पार्टी के लोग ही दूसरी पार्टी के नेता का झंडा कैसे बुलंद कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आरएलडी एवं सपा गठबंधन था। आरएलडी ने वीरेंद्र साक्षी को नरैनी से लड़ाने की तैयारी कर ली थी। साक्षी ने दिन रात एक कर गांव गांव जनसंपर्क किया और देखते ही देखते ‘जन दुलारे’ बन गए। ऐन वक्त पर गठबंधन में सीट सपा के खाते में चली गई और साक्षी का टिकट कट गया। पर उनकी सक्रियता और जनता से सीधा जुड़ाव कम नहीं हुआ। आज हालत यह है कि सपा के बूथ कार्यकर्ता भी मानते हैं कि जमीन पर साक्षी से मजबूत कोई नहीं। सर्वे टीम के सामने कार्यकर्ताओं ने खुलकर मांग रख दी कि वीरेंद्र साक्षी को सपा में शामिल कर नरैनी से टिकट दिया जाए। उनका तर्क साफ है कि साक्षी की पकड़ हर वर्ग में है। युवा, किसान, महिलाएं सब उनके साथ हैं। भाजपा से सीधी फाइट सिर्फ वही कर सकते हैं। बाकी दावेदारों के पास न संगठन है, न जमीन।

पूरे घटनाक्रम पर वीरेंद्र साक्षी फिलहाल पत्ते नहीं खोल रहे। सवाल पर बस मुस्कुराकर कहते हैं कि ‘फिलहाल तो मैं राष्ट्रीय लोकदल में ही हूं।’ उनका यह बयान सियासी गलियारों में नई खलबली मचा रहा है। न हां, न ना वाली इस रणनीति से नरैनी का सियासी पारा चढ़ गया है। सर्वे टीम की रिपोर्ट अब लखनऊ पहुंचेगी। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि नरैनी में कार्यकर्ताओं की पहली पसंद वीरेंद्र साक्षी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सपा हाईकमान कार्यकर्ताओं की इस ‘जन भावना’ को कितनी तवज्जो देता है। या फिर पुराने दावेदारों पर ही दांव खेलता है। एक बात तय है। नरैनी की सियासत में वीरेंद्र साक्षी सबसे बड़ा नाम बन चुके हैं। सर्वे टीम का आश्चर्य और कार्यकर्ताओं की जिद ने उन्हें 2027 की रेस में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।

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