कुमार गौरव
बांदा। जिले में बागै नदी में इटवां बालू खदान “अवैध खनन में इतरा” रही है, पर “प्रशासनिक खामोशी की मुर्दान्गनी” सी छाई हुई है। पट्टा धारक माफिया और उसके गुर्गे एनजीटी की सारी नियमावली को दरकिनार कर “अवैध खनन की पताका लहरा” रहें हैं?

हद तो यह है की बागै नदी पर संचालित इस खदान के वैध पट्टे की आड़ में “मौजा चकरेही में सीमा क्षेत्र से बाहर तेजी सें अवैध खनन” का साम्राज्य कायम कर दिया गया है!

अवैध खनन के लिये कुचर्चित हो गई इटवां खदान में सारे नियम और कायदों को गुप्ता और यादव की जोड़ी ने ठेंगा दिखा दिया है। सूर्यास्त होते ही “अवैध खनन का तांडव” शुरू हो जाता है। जिसका वीडियों भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ है! इस वायरल वीडियों में इटवां खदान के वैध पट्टे से इतर मौजा चकरेही में अवैध तरीके से नदी की जलधारा में पोकलैंड मशीनों से बेखौफ अवैध खनन हो रहा है? बालू से ट्रकों को ओवर लोड कर रात में परिवहन की हरी झंडी दिखा दी जाती है!
आश्चर्य यह है की अवैध खनन के प्रति “जिम्मेदार अफसर खामोशी क्यों धारण” किये हैं? “माफियाओं के साथ इनका कौन सा याराना” है। सरकार को प्रतिदिन लाखों रूपये के राजस्व को चूना लगाया जा रहा है,पर सरकारी सिस्टम आँखें बंद सी किये हुये है?













