December 13, 2025 11:39 am

दुस्साहस: डीएम साहब, राजस्व कर्मियों की मिली भगत से करोड़ों की सरकारी भूमि पर माफियाओं का डाका?

कुमार गौरव

बांदा। बांदा के राजस्व विभाग ऩे भूमाफियाओ से मिलकर फर्जी इंद्राज के माध्यम से करोड़ों की सरकारी संपत्ति हड़प ली। मामले की शिकायत को एक साल से अधिक समय हो गये लेकन रसूख दार माफियाओ के वजन से जांच दबी है। फाइल खुल नहीं पा रही।इस फाइल को खोलने एवं जांच कराने का काम प्रशासानिक कर्त्तव्यनिष्ठ जे रीभा के ही बश की बात है जो मामले की तह में जाकर फर्जीवाडा में शामिल राजस्व कर्मियों और भूमाफियाओं के कब्जे से सरकारी भूमि बचा सकतें हैं।

डीएम जे रीभा के संज्ञान में हम इस मामले के कुछ पहलुओ की जानकारी दें दें की करोड़ों की सरकारी भूमि हड़पने का यह मामला सदर तहसील की शहरी सीमा मौजा हरदौली का है, जो कनवारा बाई पास से लगा है।

बता दें की मौजा हरदौली का नान जेड एरिया गाटा संख्या 273/5 रकवा 0.725 हेक्टेयर है।इस रकबे में से 0.525 हेक्टेयर कुसमा आदि के नाम दर्ज है, जिसमें 0.200सरकारी संपत्ति है। यह रकबा सन 1414फसली के पूर्व से सन 1423 फसली के खसरा में बंजर दर्ज है। खसरा सन 1424फसली में गाटा संख्या 273/5 में रकबा 0.200 हेक्टेयर किसी के नाम दर्ज नहीं है बल्कि वह मतरुक सरकारी सम्पत्ति है।आरोप है की लेखपाल व राजस्व निरीक्षक एक ही व्यक्ति द्वारा 24 सितंबर 2014 कोएक ही राईटिंग इंद्राज किया गया की मौके पर कब्जा गाटा नंबर 273 रकबा 0.200 रावेंद्रनाथ दिवेदी पुत्र रामशरण निवासी स्वराज कालोनी तथा शारदा पुत्र सुरेंद्र निवासी तरायां का नाम उक्त भूमि में दर्ज हो। विचारणीय यह है की दोनों हस्ताक्षरों के नीचे 25सितंबर 2014 लिखी है। यानी इस तारीख़ को यह 1422फसली थी।

इसी खसरा में दूसरा फर्जी इंद्राज एक ही व्यक्ति के द्वारा 25सितंबर 2014 को गाटा संख्या 262 रकबा 0.153 की सहमति की दशा में संजय तिरवे पुत्र चंद्रशेखर निवासी कालूकुआं व रावेंद्र नाथ पुत्र रामशरण निवासी स्वराज कालोनी का जीमन 19दर्ज हो,जबकि यह 1422 फसली में दर्ज होना चाहिए। क्योकि 25 सितंबर 2014को वह सन 1422 फसली थी,तथा खसरा 1422 फसली व खतौनी सन 1422 फसली तहसील के माल अभिलेखागार में जमा थे। इसलिए 1422 फसली में फर्जी इन्द्रराज कराना असम्भव था। इसलिए फर्जी तौर पर खसरा सन 1422 फसली में फर्जी व कब्जा दर्ज करनें का इंद्राज किया गया जो फर्जी तथा अवैधानिक है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है की इसी खसरा सन 1424 फसली में अन्य गाटा व कब्जे के फर्जी इंद्राज हैं, जिस पर लेखपाल द्वारा कोई तारीख़ अंकित नहीं की गई। केवल लेखपाल का ही फर्जी अंकन बताया जा रहा है। कानूनगो द्वारा अंकित नहीं किया गया आखिर क्यों? इसलिए स्वतः जाहिर हो जाता हैं की इस खसरे पर दर्ज किये गये सारे इंद्राज फर्जी हैं! सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और शहर के अंदर हाईवे के किनारे यह भूमि होने से सरकार की करोड़ों की सम्पत्ति हड़पी जा रही है जो गम्भीर जांच का विषय है।

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