February 7, 2026 12:44 pm

माफिया रवि काना की रिहाई पे बांदा जेलर निलंबित: अधीक्षक से जवाब तलब

कुमार गौरव

बांदा। मंडल कारागार से रिहा होते ही स्क्रैप माफिया रवि काना गायब हो गया है। उसके विदेश भागने की भी आशंका जताई जा रही। दूसरी ओर, नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में बी-वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया को बांदा जेल से रिहा किए जाने पर अदालत ने शुक्रवार को सख्त नाराजगी जताई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने गंभीर लापरवाही माना। मानते हुए जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित हो गये। जेल अधीक्षक से छह फरवरी तक शपथपत्र देकर जवाब मांगा गया है। अदालत ने कहा कि क्यों ना आपके खिलाफ अभियुक्त को हिरासत से भगाने का मुकदमा चलाया जाए।

स्क्रैप माफिया रविन्द्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ उगाही के मामले में तीन धाराओं में इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-63 थाने में मामला दर्ज किया गया था। वह पहले से ही अन्य मुकदमे में जिला कारागार बांदा में बंद था। इसी दौरान नोएडा पुलिस ने अदालत में पेश कराने के लिए बी-वारंट जारी कराया। बी वारंट का मतलब बी-वारंट का मतलब होता है कि आरोपी को हर हाल में अदालत के सामने पेश किया जाए। बी-वारंट की स्थिति में आरोपी को अदालत से स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही रिहाई मिल सकती है। प्रशासनिक चूक अदालत ने आदेश में साफ कहा है कि जेल प्रशासन को यह जानकारी थी कि आरोपी नोएडा के केस में बी-वारंट पर तलब है। इसके बावजूद उसे किन परिस्थितियों में और किस आधार पर रिहा किया गया, यह समझ से परे है। अदालत के अनुसार, जब आरोपी की रिमांड की कार्यवाही चल रही थी और न्यायालय से कोई स्पष्ट रिहाई आदेश नहीं आया, तब जेल से छोड़ा जाना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा सकती है।

बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने इस संबंध में कहा कि रवि काना वर्ष 2024 में गौतमबुद्ध नगर से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित होकर मंडल कारागार बांदा आया था। इस पर पाक्सो, गैंगस्टर समेत 20 मामले थे। इसके सारे मामलों की रिहाई आ चुकी थी। सिर्फ एक मामला बचा था। इसकी रिहाई अंतिम रूप से 28 जनवरी को सुबह 7.15 बजे प्राप्त हो गई थी। दूसरे जिले का मामला होने के चलते माननीय न्यायालय को मैंने रेडियोग्राम कन्फर्मेशन के लिए भेज दिया। इसी दौरान उसका एक बी-वारंट आ गया। बी-वारंट के तहत 29 जनवरी को हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उसे न्यायालय के सामने पेश कराया। न्यायालय ने कस्टडी में लेने या नहीं लेने को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए। इस स्थिति में 6.39 पर रवि काना की रिहाई कर दी गई। फिर रात पौने आठ बजे उसका कस्टडी वारंट मिला कि दोबारा दो फरवरी को पेश करना है। वह एक बार जेल से निकल गया तो कैसे वापस लाते। अगर हम उसे रोकते तो वह हमारे खिलाफ हाईकोर्ट चला जाता कि आपने मुझे किस आधार पर रोका। न्यायालय ने इस मामले को लेकर मुझसे जवाब मांगा है।

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