कुमार गौरव
बांदा। जिले में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बेमौसम बारिश और घनघोर ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को तेज गरज के साथ बादल फटे और ओलों की बौछार ने खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया। जिले के कई क्षेत्रों में फसलें पूरी तरह चूर-चूर हो गई हैं,जबकि कटी हुई फसलें खेतों में बारिश के कारण सड़ने लगी हैं।

किसानों का कहना है कि पिछले सप्ताह भी बेमौसम बारिश ने उनकी आशाओं पर पानी फेर दिया था,अब फिर ओलावृष्टि ने उनके सालभर के मेहनत को बर्बाद कर दिया है। जिले के तिंदवारी क्षेत्र के गांवोंपरसोंड़ा, मिरगहनी, पचनेही, पिपरहरी,अतरहट में ओलों ने खेतों का दृश्य विनाश भरा बना दिया। इसी तरह बबेरू क्षेत्र के लगभग 15 से 20 गांव जैसे काजीटोला, कबीरपुर, चौहान डेरा, पिडारन, बाकल समगरा, सीरिया ताला, शमसुद्दीनपुर,औगासी,करहुली, भभुवा,अघाव सहित अन्य गांवों में भी इस घटना की पुष्टि हुई है। आंधी-तूफान के साथ पहले ओले गिरे, जिसके बाद तेज बारिश हुई। कई जगह ओलों के आकार मटर से लेकर संतरे तक बताए गए। किसानों के अनुसार, गेहूं,चना,मसूर,सरसों सहित अन्य रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।अभी तक कई क्षेत्रों में कटी हुई फसलें खलिहान तक नहीं पहुंच पाई थीं,जो अब खेतों में बारिश के पानी में डूबकर सड़ रही हैं।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिंह गौर ने बताया कि प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, लगभग 50 प्रतिशत तक फसलों के नष्ट होने की आशंका है। उन्होंने कहा,”किसानों की मेहनत धरी की धरी रह गई है। उन्होंने ने जिला प्रशासन से तत्काल फसल सर्वेक्षण कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।











