April 19, 2026 8:02 pm

पूर्व विधायक दलजीत सिंह का सिस्टम पर प्रहार, कहा- अधिकारियों की लापरवाही से किसान बर्बाद !

कुमार गौरव

बांदा। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गई है। बांदा में गेहूं खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है और इसका सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है बोरों की भारी कमी। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि किसान अपनी मेहनत की फसल लेकर खरीद केंद्रों पर दिन-रात डटे हैं, लेकिन न तो खरीद हो रही है और न ही कोई सुनवाई। मजबूर अन्नदाता अब खुले आसमान के नीचे अपनी उपज की रखवाली करने को विवश हैं।

भाजपा नेता और पूर्व विधायक दलजीत सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भले ही एक अप्रैल से खरीद शुरू करने का दावा किया हो, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने पूरी व्यवस्था को पंगु बना दिया है। किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन अंत में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। मंडी परिसर स्थित पीसीएफ गेहूं खरीद केंद्र इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। यहां रोजाना सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं भरकर पहुंचते हैं, लेकिन बोरों की कमी के चलते उनकी फसल खरीदी ही नहीं जा रही। हालात यह हैं कि किसान सुबह से शाम तक इंतजार करते हैं, लेकिन एक बोरा तक न मिलने के कारण उनका नंबर ही नहीं आ पाता।

स्थिति अब इतनी भयावह हो गई है कि किसान अपने गेहूं को खुले में ही डालकर बोरों का इंतजार कर रहे हैं। तेज धूप, धूल और मौसम की मार से फसल खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि किसान अपनी फसल की सुरक्षा के लिए रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। दिन में खरीद केंद्र की दौड़ और रात में फसल की रखवाली—यह दोहरी मार अब किसानों की सेहत पर भी भारी पड़ रही है। कई किसानों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से लगातार यही स्थिति बनी हुई है और हर बार अधिकारियों द्वारा केवल “बोरों की कमी” का बहाना बनाया जा रहा है। पूर्व विधायक दलजीत सिंह ने जिला प्रशासन से सख्त लहजे में मांग की है कि जिलाधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करें और बोरों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराएं, ताकि किसानों को राहत मिल सके और खरीद प्रक्रिया पटरी पर लौट सके।

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