विनोद मिश्रा
बांदा। राजनीति में जनाधार क्या होता है, लोकप्रियता की परिभाषा क्या है? इसका जवाब बांदा ने अपनी आंखों से देख लिया। सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के पुत्र देवांश और पुत्र वधू जिज्ञासा के आशीर्वाद समारोह में जो हुआ,उसे बांदा कभी भूल नहीं पाएगा। अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख लोगों का हुजूम। न कोई पार्टी का बैनर, न जाति का बंधन। शहर की गलियों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों,बसों में लोग पहुंचे। पूरा सदर विधानसभा क्षेत्र जैसे “एक परिवार की तरह मंडप में सिमट” आया। प्रीतिभोज में लोगों ने स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया,लेकिन चर्चा सिर्फ एक नाम की थी, प्रकाश द्विवेदी।

वर-वधू को आशीर्वाद देने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य खुद पहुंचे। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही समेत दर्जनों मंत्री, विधायक और दिग्गज नेताओं ने समारोह में भागेदारी निभाई। असली ताकत मंच के नीचे थी। वह भीड़ जो दोपहर दो बजे से लेकर देर रात तक सिर्फ एक झलक,एक अभिवादन के लिए डटी रही। यही है प्रकाश द्विवेदी की ‘असली पूंजी’। भीड़ में शामिल बुजुर्ग रामसजीवन बोले,”विधायक जी को फोन करो तो खुद उठाते हैं। सुख-दुख में दरवाजे पर खड़े मिलते हैं। इसलिए हम आए हैं।” ग्रामीण महिला सुमन ने कहा,”बिटिया की शादी में मदद की थी,आज उनके बेटे की खुशी में न आएं तो कैसे चलेगा?” यह रिश्ता वोट का नहीं,विश्वास का है।

राजनीतिक पंडित भी मान रहे हैं कि यह आयोजन सिर्फ पारिवारिक समारोह नहीं था। यह विधायक प्रकाश द्विवेदी की जन लोकप्रियता का ‘प्रेम प्रदर्शन’ था, जिसने इतिहास सा रच दिया। लगभग एक लाख लोगों की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि द्विवेदी का जनाधार दलगत सीमाओं से बहुत ऊपर है। यहआयोजन ‘भूतो न भविष्यति’ सियासत की अमिट गाथा बन गया। जो संदेश दे रहा था की जब तक जनता के दिलों में जगह है, कुर्सी कोई छीन नहीं सकता। प्रकाश द्विवेदी ने बांदा में यह लाइन सच कर दिखाई है।










