विनोद मिश्रा
बाँदा। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मोहन साहू का चप्पल कांड अब समाजवादी पार्टी के लिए सियासी कैंसर बन गया है। रेखा देवी नाम की अनुसूचित जाति की महिला ने सरेआम कार में उनपर चप्पल बरसाकर वह घाव दे दिया जो पार्टी की इज्जत पर सीधा लगा है। कार्यकर्ता दबी जुबान में कह रहे हैं, ‘लागा चुनरी में दाग छुड़ाऊं कैसे?’

महिला का आरोप बेहद संगीन है। उसका कहना है कि मोहन साहू और उनके साथियों ने जबरन उसका मकान खाली करा दिया। सामान सड़क पर फेंक दिया। बेटी के साथ अभद्रता की। इसी अत्याचार का बदला लेने वह चप्पल लेकर गाड़ी तक पहुंच गई। राजघाट मिट्टी से लौट रहे पूर्व चेयरमैन को शायद अंदाजा भी नहीं था कि जनता की अदालत यूं लगेगी। सपा जिस पीडीए फॉर्मूले के दम पर सियासी जमीन तलाश रही थी,उसी के एक कथित सिपाही पर अनुसूचित जाति की महिला को बेघर करने का आरोप लग गया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर बोल रहे हैं कि इस कांड ने पीडीए की पूरी राजनीति को झटका दे दिया है। जनाधार खिसकने का डर सताने लगा है।

सियासी गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा है कि “मोहन साहू छुपा भेड़िया” निकला। जनता के सामने समाजवाद का चोला और पीछे अत्याचार का खेल! खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग। इस दोहरे चरित्र ने पार्टी की साख को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है! भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने मौके को लपक लिया है। तीनों दलों के नेता एक सुर में मांग कर रहे हैं कि मोहन साहू के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी हो। अनुसूचित जाति की महिला के उत्पीड़न का मुद्दा अब सपा के गले की हड्डी बन गया है।

चप्पल कांड का वीडियो वायरल होने के बाद सपा खेमे में सन्नाटा है। आलाकमान चुप है और जिला स्तर के नेता मुंह छिपा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का सिर शर्म से झुक गया है। प्रश्नउठ रहा है कि क्या पार्टी ऐसे ‘अत्याचारी’ नेताओं को ढोती रहेगी! फिलहाल पुलिस चुप है पर सियासत गरम है। मोहन साहू पर “चप्पलों की दनादन” ने पूरी समाजवादी पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना है कि पार्टी दाग धोती है या दागदार चेहरों के साथ चलती है।











