कुमार गौरव
बांदा। नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 30 बेड का अस्पताल होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध न होना स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग डेढ़ लाख की आबादी इस कमी के कारण परेशान है। अल्ट्रासाउंड सुविधा न होने से मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जहां 500 से 700 रुपये तक शुल्क वसूला जाता है। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर से करार किया है, लेकिन अन्य मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी जांच की निर्धारित तिथियां सीमित होने के कारण कई महिलाओं को निजी जांच केंद्रों में महंगी जांच करानी पड़ती है। क्षेत्र के लोगों ने शासन से सीएचसी में जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड मशीन और विशेषज्ञ की स्थायी तैनाती की मांग की है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास यादव ने बताया कि कस्बे में केडी हाईटेक डायग्नोस्टिक सेंटर से विभाग का करार है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं की निशुल्क अल्ट्रासाउंड जांच प्रत्येक माह चार अलग-अलग तारीखों पर कराई जाती है। उन्होंने बताया कि सीएचसी में स्थायी अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।











