April 29, 2026 10:31 am

युद्ध के चलते बाजार में महंगाई का तूफान : दाल-चावल से लेकर रिफाइंड तक के दामों में उछाल

कुमार गौरव

बांदा। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और युद्ध के प्रभाव स्थानीय बाजारों तक पहुंच चुके हैं। आयातित सामानों पर बढ़ती महंगाई के कारण बांदा के बाजारों में रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम में लगातार उछाल आ रहा है। खासकर दालों, चावल और खाने के तेल में करीब 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम आदमी की थाली महंगी होती जा रही है।

जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ी है। यही लागत आखिरकार स्थानीय बाजार में महंगाई के रूप में उभर रही है। आयात पर निर्भर तेल और खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। बाजार की स्थिति पर नजर डालें तो अरहर दाल के दाम 130 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 135 रुपये हो गए हैं। वहीं, चना दाल 70 रुपये से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो हो गई है। मूंग छिलका दाल 110 से 115 रुपये, उड़द छिलका दाल 115 से बढ़कर 125 रुपये और मसूर दाल 75 से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो हो गई है। चावल के दाम भी 70 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। इसके अलावा, खाने का रिफाइंड तेल 15 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। जहां यह पहले 150 रुपये प्रति लीटर था, अब यह 165 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

व्यापार मंडल के नेता अमित सेठ भोलू ने कहा,”पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। खासकर तेल और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से खाद्य सामग्री के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। अगर जल्द युद्ध खत्म नहीं होता, तो महंगाई और बढ़ सकती है।” किराना व्यापारी बिहारी लाल ने बताया, “दालों के दाम तो लगातार बढ़ रहे हैं। रिफाइंड के भाव भी ऊपर जा रहे हैं। कुछ लोग महंगाई को देखते हुए खाद्य सामग्री की जमाखोरी भी कर रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है।” स्थानीय निवासी राजकुमार यादव ने कहा, “हर हफ्ते बाजार में कुछ न कुछ महंगा हो रहा है। खासकर दालें और तेल अब आम आदमी की पहुंच से बाहर जा रहे हैं। पहले से ही महंगाई के दबाव में जीवन जी रहे लोगों के लिए यह नया झटका काफी कठिन है।”

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