कुमार गौरव
बांदा। बुंदेलखंड के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। महोबा, जो अब तक अपने खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता रहा है, जल्द ही शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। खनिज यूनिवर्सिटी की स्थापना को लेकर शासन स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

इस पहल के पीछे प्रमुख भूमिका एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर की मानी जा रही है। उन्होंने हाल ही में बजट सत्र के दौरान सदन में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और महोबा में खनिज यूनिवर्सिटी की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनके इस प्रयास को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

नेता सदन एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस प्रस्ताव को प्राथमिकता देते हुए खान विभाग को निर्देश दिए हैं कि खनिज न्यास की बैठक में इस विषय को रखा जाए और प्रस्ताव पारित कर जल्द से जल्द शासन को भेजा जाए। यह कदम यूनिवर्सिटी की स्थापना की दिशा में पहला औपचारिक पड़ाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खनिज यूनिवर्सिटी की स्थापना न केवल महोबा, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकती है। इससे खनन, भूविज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
अब तक उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए युवाओं को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन यूनिवर्सिटी बनने के बाद उन्हें अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खनिज यूनिवर्सिटी के जरिए क्षेत्र में खनन आधारित उद्योगों को नई दिशा मिल सकती है। इससे निवेश बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।










