कुमार गौरव
बांदा। शहर को अतिक्रमण मुक्त और सुंदर बनाने के दावों के बीच, जिला प्रशासन और नगरपालिका ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया है। कचहरी तिराहे के पास किए गए इस अभियान में प्रशासन का बुलडोजर जमकर गरजा, जिसका मुख्य निशाना पटरी दुकानदार रहे। वहीं, इस कार्रवाई का कम्युनिस्ट पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है।

नगरपालिका प्रशासन का मानना है कि शहर को स्वच्छ और सुगम बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण अत्यंत आवश्यक है। पिछले काफी समय से अतिक्रमण के कारण शहरवासी भीषण जाम की समस्या से जूझ रहे थे। प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी के बावजूद अतिक्रमणकारी बाज नहीं आ रहे थे, जिसके चलते एक बार फिर ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ का पहला चरण शुरू किया गया। पालिका की टीम ने जेसीबी और बुलडोजर की मदद से सड़क किनारे रखे डिब्बे और अन्य सामान जब्त कर ट्रैक्टरों में लादकर पालिका परिसर भिजवा दिए।

इस कार्रवाई पर कम्युनिस्ट पार्टी ने तीखा हमला बोला है। पार्टी के नेता देवनाथ यादव ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “मजदूर दिवस के दिन गरीबों और मेहनतकशों के पेट पर लात मारना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अगर इन रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को हटा दिया गया, तो वे अपना परिवार पालने के लिए आखिर कहाँ जाएंगे?” उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली को गरीब-विरोधी करार दिया। दूसरी ओर, स्थिति को स्पष्ट करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकित बासू ने कहा कि यह कार्रवाई शहर के व्यापक हित में की गई है। उन्होंने कहा, “शहर की सुंदरता और सुगम यातायात के लिए कभी-कभी कड़वे फैसले लेने पड़ते हैं। हालांकि, हमने इन पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित रूप से पुनर्वासित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, जो अभी विचाराधीन है।” शहर में लंबे समय से चल रहे इन अभियानों को लेकर स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। एक तरफ जहां जाम से परेशान नागरिक प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या केवल अतिक्रमण हटाना ही समाधान है? अक्सर देखा गया है कि ‘ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता ही गया’ की तर्ज पर, प्रशासन के जाने के कुछ ही दिनों बाद अतिक्रमण फिर से कायम हो जाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।










