विनोद मिश्रा
चित्रकूट। चित्रकूट सदर विधान सभा सीट जहां हर बार मुकाबला कांटे का होता है और सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा कोई नहीं जानता। इस सीट पर सपा ने पिछली बार बाजी मारी थी, लेकिन इस बार खुद सपा के अंदर ही टिकट को लेकर घमासान मचा है। मौजूदा विधायक अनिल प्रधान की कुर्सी खतरे में है और टिकट के दावेदारों ने लखनऊ तक लॉबिंग तेज कर दी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा हाईकमान के सर्वे में अनिल प्रधान रेड जोन में चले गए हैं। अंदरखाने की रिपोर्ट कहती है -जनता में पकड़ कमजोर, जमीन पर सक्रियता घटी और सोशल मीडिया पर तो मानो विलुप्त से हैं। आज की राजनीति में जो दिखता नहीं,वह बिकता भी नहीं। इसी कमजोर नस एवं कथित तौर पर निधियों में कमीशन आदि आरोपों को लेकर विरोधियों ने खेल शुरू कर दिया है!

टिकट की रेस में सपा के अन्य नेताओं में सबसे पहला नाम पूर्व विधायक एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रहे वीर सिंह का है। दो बार के जनप्रतिनिधि,जिला पंचायत से लेकर विधानसभा तक का अनुभव। लेकिन चर्चा है कि ब्राह्मण वोट बैंक उनके अविश्वसनीय व्यवहार से उनसे छिटक चुका है! फिर भी शतरंज के माहिर खिलाड़ी की तरह उन्होंने गोटियां बिछा दी हैं।

दूसरा नाम पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज यादव का है,इनके पिता राजबहादुर यादव भी जिलाध्यक्ष रहे औऱ मुलायम सिंह के बेहद करीबी थे। असमय निधन के बाद विरासत अनुज को मिली। युवा चेहरा,संगठन में पकड़ और ऊपर से अखिलेश यादव का वरदहस्त उन्हें रेस में मजबूती बनाये है। इसी क्रम में एक नाम शिव शंकर यादव का भी है। पार्टी के पुराने वफादार निर्भय सिंह पटेल भी साइलेंट दावेदार के रूप में टिकट की लाइन में हैं,वह अपने को पटेल औऱ ब्राह्मण समीकरण में फिट मानतें हैं। जिले की मानिकपुर विधान सभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
वहीं पूर्व सांसद रामसजीवन सिंह के पौत्र दीपक पटेल भी विरासत के ट्रंप कार्ड के सहारे दावेदारी कर रहे हैं। उनके बाबा चार बार विधायक और तीन बार सांसद रहे हैं,जबकि मां कांग्रेस से सांसद का चुनाव लड़ चुकी हैं। साफ है,अनिल प्रधान चारों तरफ से घिर चुके हैं। अगर सर्वे रिपोर्ट ही टिकट का आधार बनी,तो चित्रकूट सदर में इस बार नया चेहरा देखने को मिल सकता है!अब निगाहें लखनऊ पर टिकी हैं कि अखिलेश यादव किस पर दांव लगाते हैं ,मौजूदा विधायक पर भरोसा या किसी नए चेहरे पर सट्टा?










