विनोद मिश्रा
बांदा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जहां “जनता दरबार” और “सीधे संवाद” की बात करती है, वहीं बांदा जिले में जिला स्तरीय अधिकारी और कई जनप्रतिनिधि वाट्सअप पर प्राइवेसी लगाकर जनता से दूरी बना रहे हैं। पहले समस्या की फोटो या शिकायत सीधे वाट्सअप पर भेज दी जाती थी। अब अधिकांश अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नंबर पर प्रोफाइल, स्टेटस और लास्ट सीन गायब है। मैसेज भेजो तो सिंगल टिक। फोन करो तो जवाब नहीं। यानी शिकायत का सबसे तेज और पारदर्शी पुल ही तोड़ दिया गया। कुछ अधिकारी और नेता जानबूझकर संपर्क से बच रहे हैं ताकि जवाबदेही से बचा जा सके। विधायक प्रकाश एवं मंत्री रामकेश को छोड़ दें तो अधिकांश प्राइवेसी की ही परिधि में आते हैं। जनता सवाल कर रही है कि जब प्रदेश सरकार की कार्यशैली को सबसे तेज माना जाता है, तो बांदा में ही अधिकारियों को प्राइवेसी का शौक क्यों चढ़ा है। क्या यह सरकार की छवि खराब करने की साजिश नहीं है?

परिणाम यह है कि फरियादी कलेक्ट्रेट और विकास भवन के चक्कर काटने को मजबूर हैं। समस्या जस की तस पड़ी है और समाधान के सारे दरवाजे बंद हैं। अब मांग उठ रही है कि शासन को सख्ती दिखानी चाहिए। एक कमेटी बनाकर हर जिले में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सरकारी वाट्सअप नंबरों की जांच हो। जिसने बिना वजह प्राइवेसी लगा रखी है उस पर कार्रवाई हो। क्योंकि जनता से कटकर चलने वाले अधिकारी और नेता सरकार की नीतियों को जमीन पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं?










