कुमार गौरव
बांदा। बालू खदानों को लेकर एक बार फिर पत्रकारिता की साख और प्रेस क्लब की पहचान आमने-सामने आ गई है। कुछ कथित पत्रकार संगठनों और उनसे जुड़े लोगों पर बालू खदानों से कथित तौर पर मासिक धनराशि वसूलने के गंभीर आरोप हैं। वही लोग स्वर्गीय सुरेश चंद्र गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब बांदा से जुड़ने की अनधिकृत कोशिश कर रहे हैं,ताकि क्लब के नाम और पहचान का इस्तेमाल अपने बालू खदानों से रंगदारी हित में किया जा सके! इस स्थिति को लेकर स्वर्गीय सुरेश चंद्र गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है और साफ कर दिया है कि प्रेस क्लब का नाम किसी भी प्रकार की कथित उगाही, दबाव या निजी हित के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।

इस प्रेस क्लब के महामंत्री विनोद मिश्रा के मुताबिक,कुछ लोग अलग-अलग मीडिया संगठनों के नाम पर खदानों में अपनी सूचियां पहुंचाते हैं और कथित तौर पर वहां से मासिक राशि लेने का प्रयास करते हैं। वसूली गई रकम कथित तौर पर लोगों की हैसियत और प्रभाव के अनुसार बांटी जाती है।इनमें ऐसे मीडिया प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं जिनकी नियमित प्रिंट या प्रसारण उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। बालू जीवी कुछ पत्रकार कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आसपास लगातार सक्रिय रहते हैं, ताकि अधिकारियों के बीच अपनी पहचान और प्रभाव बनाया जा सके! महामंत्री विनोद मिश्रा नें बताया की इसी बीच कुछ लोगों द्वारा जिलाधिकारी को स्वर्गीय सुरेश चंद्र गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब भवन को लेकर ज्ञापन के माध्यम से गुमराह करने की साजिश की गई जो अति निंदनीय है। बाबूलाल चौराहे स्थित प्रेस क्लब भवन को वैध पत्रकार संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की लिखित मांग पर बैठकों एवं गोष्ठियों के लिए उपलब्ध कराया जाता है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की बैठकें भी यहां होती है।
प्रेस क्लब के महामंत्री विनोद मिश्रा ने साफ कहा है कि किसी भी कथित वसूली या दलाली से जुड़े व्यक्ति को क्लब के नाम और भवन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने अपील की कि यदि कोई व्यक्ति प्रेस क्लब के नाम पर पैसे की मांग करता है तो इसकी सूचना पुलिस और क्लब पदाधिकारियों को दी जाए, ताकि मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई कराई जा सके। महामंत्री ने प्रशासन से कथित वसूली और ब्लैकमेलिंग से जुड़े आरोपों की जांच कराने की भी मांग की है।










