विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की सबसे बड़ी बाधा आज भी रेल कनेक्टिविटी की कमी है। मध्य प्रदेश के सागर से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर तक प्रस्तावित रेलमार्ग, जो अतर्रा और बबेरू जैसे महत्वपूर्ण कस्बों से होकर गुजरेगा, क्षेत्र की दशा और दिशा बदल सकता है। यह 200 किलोमीटर का रेल कॉरिडोर सिर्फ दो शहरों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि दो राज्यों के चार जिलों को एक बाजार से जोड़ेगा।

आज इस क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। घंटों का सफर और बढ़ता खर्च आम आदमी की कमर तोड़ रहा है। कृषि प्रधान बुंदेलखंड में किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रेल सुविधा मिलने से परिवहन सस्ता होगा और बिचौलियों का चक्र टूटेगा। अतर्रा और बबेरू के लघु उद्योगों को भी राष्ट्रीय बाजार मिलेगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां-जहां रेल पहुंची है वहां उद्योग, व्यापार और पर्यटन तीनों बढ़े हैं। सागर-फतेहपुर लाइन बनने से बुंदेलखंड भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएगा। क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से मांग है कि इस प्रस्तावित रेललाइन का सर्वे कार्य जल्द पूरा कर निर्माण शुरू किया जाए। क्योंकि बुंदेलखंड को अब सिर्फ सड़कें नहीं, पटरी भी चाहिए।










