कुमार गौरव
बांदा। जिले में सामने आए एक कथित स्टिंग ऑपरेशन ने न सिर्फ बालू खनन कारोबार बल्कि मीडिया जगत को भी झकझोर कर रख दिया है। मरौली बालू खदान खंड संख्या-4 से जुड़ा यह मामला अब सुर्खियों में है,जहां कुछ लोगों पर पत्रकारिता की आड़ में खनन से जुड़े लेन-देन और प्रभाव का उपयोग करने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है,लेकिन वायरल सामग्री ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

वायरल हो रहे कथित स्टिंग वीडियो में कुछ पत्रकार नें ही यह स्टिंग आपरेशन किया जिसमें भारत समाचार के संवाददाता मनोज गोस्वामी से खदान संचालक कह रहा है की आपने ठेका लिया था की कोई पत्रकार नहीं आयेगा यहां तो रोजाना पत्रकारों का आवागमन हो रहा है। परेशान करते है। इस पर मनोज गोस्वामी की आवाज आती है की पोर्टल वाले है। इनका कोई वजूद नहीं। इस नादान को यह मालूम ही नहीं की बड़ा से बड़ा अखबार एवं चैनल सब यूट्यूब औऱ पोर्टल पर आ चुके हैं। इसी का महत्व संचार क्रांति में बढ़ चुका है। इससे यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे का दुरुपयोग हो रहा है? इस घटनाक्रम ने मीडिया की साख को लेकर भी बहस छेड़ दी है जो पत्रकारिता की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। क्या कुछ लोग निजी लाभ के लिए इस पेशे का दुरुपयोग कर रहे हैं?इस घटनाक्रम ने मीडिया जगत को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है।










