कुमार गौरव
बांदा। शहर के दिल में छिपे गुटका माफिया के “काले साम्राज्य” का राज अंततः खुल गया है। बांदा पुलिस ने कोतवाली नगर क्षेत्र के सुतरखाने मोहल्ले में एक विशाल अवैध गुटखा फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में गुटखा, सुपारी, पैकिंग सामग्री, रैपर्स और निर्माण की मशीनें बरामद हुईं, जो इस घिनौने धंधे के संगठित और बड़े पैमाने पर संचालन की पुष्टि करती हैं। यह छापा पुलिस टीम ने सूचना मिलने के बाद तुरंत किया। जैसे ही अधिकारी सुतरखाने मोहल्ले की उस इमारत में घुसे, जहां यह फैक्ट्री छिपी थी, तो वे चौंक गए। मशीनों की घरघराहट के बीच बड़े पैमाने पर गुटखे का उत्पादन जारी था और पैक किए गए प्रोडक्ट बाजार भेजने के लिए तैयार थे। “हमने अपनी जांच में पाया कि यह कोई छोटा-मोटा घरेलू धंधा नहीं था, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था,” पुलिस उपाधीक्षक (सदर) राजीव कुमार ने संवाददाताओं को बताया। “यह फैक्ट्री बिना लाइसेंस, बिना आरोग्य मानकों और किसी निगरानी के बिना लंबे समय से संचालित हो रही थी।”

मौके से जब्त किए गए साक्ष्यों से पता चलता है कि यहां बनने वाला गुटखा सस्ते दाम और आकर्षक पैकिंग के जरिए युवाओं और बच्चों के बीच तेजी से फैल रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गुटखे में कैंसरकारी रसायन मौजूद होते हैं, जो मुंह के कैंसर से लेकर दांतों और मसूड़ों की गंभीर समस्याओं तक का कारण बन सकते हैं। “यह सिर्फ एक अवैध उत्पाद नहीं है, बल्कि लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है,” जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा। “इसके बाजार में फैलने से न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे में है, बल्कि युवा पीढ़ी संवेदनशील बीमारियों की ओर बढ़ रही है।” सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह अवैध फैक्ट्री बांदा शहर के सबसे घनी आबादी वाले इलाके में स्थित थी। हजारों लोगों के बीच बिना किसी रुकावट के यह घिनौना उद्योग चल रहा था, जिसके बारे में प्रशासन या नियामक एजेंसियों को किसी को भनक तक नहीं लगी। इस पर जिले के नागरिकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सच में लापरवाही थी या फिर प्रशासन के कुछ तत्वों की मिलीभगत? कई नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार गंदगी, बदबू और बड़े पैमाने पर सामान की आवाजाही देखी जा रही थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने मौके पर मौजूद दो आरोपियों — 35 वर्षीय राजेश पांडेय और 42 वर्षीय सुरेश यादव — को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। हालांकि, पुलिस का मानना है कि यह अपराध नेटवर्क महज दो लोगों से आगे तक फैला हुआ है। “हमारी जांच जारी है। हम इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे कौन-कौन बड़े खिलाड़ी हो सकते हैं, इसकी जांच चल रही है,” डीएसपी राजीव कुमार ने कहा। इस मामले में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, आबकारी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध उत्पादन से न केवल स्वास्थ्य खतरे पैदा हो रहे थे, बल्कि राज्य सरकार को भी करों के रूप में भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था। बिना टैक्स और लाइसेंस के चल रही यह फैक्ट्री नियमित व्यवसायों के लिए भी अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही थी।
बांदा के नागरिकों में इस कार्रवाई के बाद हर्ष है, लेकिन साथ ही नाराजगी भी। कई नागरिक मांग कर रहे हैं कि सिर्फ दो लोगों को गिरफ्तार करने से कुछ नहीं होगा। “अगर जड़ों तक न पहुंचा गया, तो कुछ हफ्तों बाद यही धंधा कहीं और दोबारा शुरू हो जाएगा,” स्थानीय व्यापारी रामकुमार तिवारी ने कहा। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सचमुच इस जहर के नेटवर्क को ध्वस्त कर पाएगा? या फिर यह कार्रवाई महज एक ‘नाटकीय प्रदर्शन’ साबित होगी? समय ही बताएगा। लेकिन आज, बांदा की सड़कों पर एक सवाल गूंज रहा है — कब तक छिपेंगे गुटका माफिया के मालिक, जो हमारे बच्चों की सेहत के साथ खेल रहे हैं?











