कुमार गौरव
बांदा। सदर विधानसभा के विधायक प्रकाश द्विवेदी ने राज्य में संचालित निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा छात्रों और उनके अभिभावकों पर डाले जा रहे आर्थिक,शारीरिक एवं मानसिक दबाव को लेकर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों द्वारा किए जा रहे “मनमाने व्यवहार” को समाज के लिए गंभीर समस्या बताया और त्वरित कार्रवाई का आह्वान किया।

अपने पत्र में विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में शिक्षा धीरे-धीरे एक व्यवसाय में तब्दील होती जा रही है,जहाँ अभिभावकों के बजट और बच्चों के स्वास्थ्य दोनों की अनदेखी हो रही है। विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि कई निजी स्कूल हर साल पाठ्यक्रम में बिना किसी उचित कारण के बदलाव करके महंगी पाठ्यपुस्तकों को अनिवार्य कर देते हैं,जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। “एक ही परिवार के बड़े बच्चे की पुस्तकें छोटे भाई-बहनों के लिए उपयोगी नहीं बन पातीं। इसके परिणामस्वरूप न केवल परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है,बल्कि संसाधनों की बर्बादी भी हो रही है। विधायक ने पर्यावरण पर इस प्रथा के दुष्प्रभाव को भी उजागर किया। उनका कहना है कि हर साल लाखों टन कागज इन अनावश्यक पुस्तक परिवर्तनों के कारण व्यर्थ जाता है, जिससे वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

प्रकाश द्विवेदी ने स्कूल बैग के अत्यधिक वजन पर भी गहरी चिंता जताई। कहा कि बच्चों के बैग अक्सर उनके शारीरिक विकास के लिए सुरक्षित सीमा से भी ज्यादा भारी होते हैं। कहा प्रदेश में समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए ताकि सभी छात्रों को समान शैक्षिक अवसर मिल सके। सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अनिवार्य हो,ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो सके। पाठ्यपुस्तकों के मूल्य निर्धारण पर सख्त नियंत्रण रखा जाए और प्रकाशकों के साथ अनुचित लाभ की संभावना को रोका जाए। विधायक प्रकाश नें मांग किया है की प्रत्येक जनपद स्तर पर विशेष जांच समिति का गठन किया जाए,जो निजी विद्यालयों की फीस संरचना, पुस्तक चयन और संचालन प्रणाली की समीक्षा करे। संबंधित शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। अभिभावकों के लिए एक पारदर्शी एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।











