कुमार गौरव
बांदा। जिले में आज शोक की लहर दौड़ पड़ी जब जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, स्टेशन रोड पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई के दुःखद निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। पार्टी के जन-जन ने उनके आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके जीवन व संघर्ष को याद किया।

मोहसिना किदवई का आज बुधवार सुबह नोएडा के मेट्रो अस्पताल में 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन से न केवल बांदा जिला बल्कि पूरी राजनीतिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा, “मोहसिना किदवई जी का आज बुधवार को नोएडा के मेट्रो अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने 1 जनवरी, 1932 को बांदा के छावनी मोहल्ले में स्थित गणेश राइस एंड डाल मिल में जन्म लिया था। उनका बांदा से आजीवन गहरा आत्मीय लगाव रहा। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।”

राजेश दीक्षित ने आगे कहा कि मोहसिना किदवई का योगदान केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय नेतृत्व में रहीं और राजीव गांधी की सरकार में महत्वपूर्ण विभागों का संचालन किया। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया और महिला सशक्तिकरण, शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। शोक सभा में उपस्थित जिला महासचिव शोएब रिजवी ने कहा, “मोहसिना जी ने न केवल राजनीति में बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए सदैव आवाज उठाई। उनके व्यक्तित्व में एक ऐसी गरिमा थी, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।” जिला वक्ता राजेश कुमार गुप्ता ‘पप्पू’ ने कहा कि “मोहसिना किदवई जी ने अपने जीवन को कांग्रेस की आदर्श नीतियों के अनुसार जिया। वह आम जनता की समस्याओं के प्रति सच्ची चिंता रखती थीं। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है।” शोक सभा में राजबहादुर गुप्ता, इरफान खान सभासद, अशरफ उल्ला खान ‘रम्पा’, छेदीलाल धुरिया, लालबाबू राजपूत, के.पी. सेन, शब्बीर सौदागर, सुखदेव गांधी, अली बख्श, सैय्यद वारिस अली सहित कई कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, मोहसिना किदवई की अंतिम यात्रा आज दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कब्रिस्तान में शाम लगभग 5:30 बजे संपन्न हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस अंतिम यात्रा में भाग लिया। मोहसिना किदवई के दामाद रजीउर रहमान किदवई ने बताया कि “वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। हालांकि, उनका हौसला कभी नहीं टूटा। वह तकरीबन अंत तक राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहीं।”

मोहसिना किदवई का जीवन कांग्रेस पार्टी के संघर्ष का प्रतीक रहा। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद के भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए अग्रणी योगदान दिया। उनके निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कई शीर्ष नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। बांदा की सीमाओं से परे, मोहसिना किदवई ने उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में एक ऐसा छाप छोड़ा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। आज जिला कांग्रेस कार्यालय में उनके नाम की झंडी आधी डाली गई और उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया।
“जो जाते हैं, उनका संदेश बचता है — मोहसिना किदवई की आदर्शवादी राजनीति और समाजसेवा का संदेश हमेशा जीवित रहेगा।”











